करम पर्व पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल संतोष गंगवार और बाबूलाल मरांडी ने दी शुभकामनाएं

करम पर्व पर CM हेमंत सोरेन, राज्यपाल और बाबूलाल मरांडी ने दी शुभकामनाएं, कहा- प्रकृति और संस्कृति से जोड़ता है यह पर्व

प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम है करम पर्व, CM हेमंत सोरेन, राज्यपाल और नेता प्रतिपक्ष ने दी शुभकामनाएं

Ranchi: झारखंड में प्रकृति और लोक-संस्कृति के महापर्व करम (करमा) की धूम है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और विधायक कल्पना सोरेन ने प्रदेशवासियों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने करम पर्व को झारखंड की सांस्कृतिक पहचान, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक एकजुटता से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व बताया।

प्रकृति की आराधना और सांस्कृतिक विरासत का पर्व

करम पर्व के दौरान करम वृक्ष की डाली स्थापित कर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है। गांवों के अखड़ों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा होती है और मांदर-ढोल की थाप पर करमा और झूमर नृत्य का आयोजन किया जाता है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में जल, जंगल और जमीन के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर भी है। उन्होंने करम पर्व को प्रकृति के संरक्षण और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देने वाला पर्व बताया।

भाई-बहन के प्रेम और सुख-समृद्धि की कामना

करम पर्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष भाई-बहन के रिश्ते से भी जुड़ा है। इस अवसर पर बहनें करम देवता की पूजा कर अपने भाइयों के सुख, स्वास्थ्य, लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपने संदेश में करम पर्व को भाई-बहन के पवित्र प्रेम और सामाजिक एकजुटता से जोड़ते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

अखड़ा में दिखती है सामाजिक एकजुटता

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने करमा पूजा के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे सामुदायिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान गांव के लोग अखड़ा में एकत्र होकर पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य में शामिल होते हैं।

मांदर और ढोल की थाप पर होने वाला सामूहिक नृत्य करम पर्व के सांस्कृतिक उल्लास को और बढ़ाता है। अखड़ा ग्रामीण जीवन में सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ता है करम पर्व

करम पर्व के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों और सुनाई जाने वाली लोककथाओं में प्रकृति, श्रम, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक जीवन से जुड़े संदेश मिलते हैं। यही वजह है कि यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी बनता है।

झारखंड में करम पर्व के अवसर पर गांवों से लेकर शहरों तक उत्सव का माहौल है। पारंपरिक पूजा-अर्चना, लोकगीत, मांदर की थाप और करमा नृत्य के बीच लोग इस लोकपर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मना रहे हैं।

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