रांची के भव्य पंडालों में दिखे तंजावुर मंदिर, द्वारका और महाभारत के दर्शन

रांची के पंडालों में आस्था और कला का संगम, महाभारत से स्वर्वेद महामंदिर तक की थीम

Ranchi Durga Puja 2026: कहीं बृहदेश्वर मंदिर तो कहीं द्वारकाधीश का स्वरूप, भव्य पंडालों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

रांची: शारदीय नवरात्र के अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची में दुर्गापूजा का उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों में बने भव्य पूजा पंडाल अपनी आकर्षक सजावट, कलात्मक संरचनाओं और अनूठी थीम के कारण श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रहे हैं। कहीं दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर की झलक दिखाई दे रही है, तो कहीं द्वारकाधीश मंदिर, महाभारत के प्रसंग और आध्यात्मिक केंद्रों की प्रतिकृतियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं।

शाम होते ही पंडालों की रोशनी, पूजा-अर्चना और मां दुर्गा के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठता है। इन पंडालों में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय स्थापत्य कला, इतिहास और संस्कृति की झलक भी देखने को मिल रही है।

बकरी बाजार में बृहदेश्वर मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल

बकरी बाजार स्थित भारतीय युवक संघ का पूजा पंडाल तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरित है। पंडाल के प्रवेश द्वार और बाहरी सजावट में देवी-देवताओं की आकृतियों को जगह दी गई है।

पंडाल में स्थापित मां दुर्गा की सुसज्जित प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर की शैली में तैयार इस संरचना के जरिए दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला की झलक रांची में देखने को मिल रही है।

अलबर्ट एक्का चौक पर द्वारकाधीश मंदिर की झलक

रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर चंद्रशेखर आजाद क्लब का पंडाल गुजरात के प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर की थीम पर तैयार किया गया है। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका से प्रेरित इस पंडाल में आकर्षक कलाकृतियों और सजावट के माध्यम से धार्मिक वातावरण तैयार किया गया है।

मां दुर्गा की प्रतिमा के दर्शन के लिए यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पंडाल की थीम और कलात्मक सज्जा आकर्षित कर रही है।

राजस्थान मित्र मंडल के पंडाल में महाभारत के प्रसंग

सेवा सदन पथ पर राजस्थान मित्र मंडल ने महाभारत की थीम पर आधारित पंडाल तैयार किया है। इसमें महाभारत से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को झांकियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

द्रौपदी के स्वयंवर सहित महाकाव्य के अन्य प्रसंगों को कलात्मक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। झांकियों के साथ दिए गए विवरणों के जरिए दर्शकों को भारतीय परंपरा, धर्म और नीति से जुड़े प्रसंगों की जानकारी मिलती है।

जिला स्कूल परिसर में स्वर्वेद महामंदिर की प्रतिकृति

जिला स्कूल परिसर में वाराणसी के प्रसिद्ध स्वर्वेद महामंदिर से प्रेरित भव्य पंडाल बनाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी चौड़ाई लगभग 150 फीट और ऊंचाई करीब 100 फीट है। पंडाल के बीच में लगभग 30 फीट ऊंचा गर्भगृह तैयार किया गया है।

विशाल संरचना, रंगीन सजावट और मां दुर्गा की प्रतिमा इस पंडाल को खास बना रही है। यहां आने वाले श्रद्धालु इसकी भव्यता और कलात्मक प्रस्तुति को देख सकते हैं।

बांग्ला स्कूल में शिला कैलाश की अनूठी थीम

बांग्ला स्कूल स्थित ओसीसी क्लब का पंडाल शिला कैलाश की अवधारणा पर आधारित है। इसकी थीम में एक विशाल पाषाण से मां दुर्गा सहित देवी-देवताओं के प्राकट्य की कल्पना को कलात्मक रूप देने का प्रयास किया गया है।

यह प्रस्तुति धार्मिक आस्था और शिल्पकला के मेल को दर्शाती है। पंडाल की अवधारणा के जरिए सृष्टि और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े विचारों को सामने रखा गया है।

कचहरी रोड पर पुराने जीवन और सादगी की झलक

कचहरी रोड स्थित त्रिकोण हवन कुंड का पूजा पंडाल आधुनिक जीवनशैली के बीच सादगी और मानवीय संबंधों के महत्व को केंद्र में रखता है। पंडाल की थीम में पुराने समय के जीवन, गांवों की दिनचर्या और परिवहन से जुड़े दृश्य दिखाए गए हैं।

डीजल ट्रेन, हावड़ा ब्रिज और ग्रामीण जीवन की झलक के माध्यम से अतीत की जीवनशैली को प्रस्तुत किया गया है। इंटरनेट और आधुनिक तकनीक के दौर में यह थीम लोगों को सादगी, सामाजिक रिश्तों और आपसी जुड़ाव पर विचार करने का अवसर देती है।

आस्था, संस्कृति और कला का संगम बनी दुर्गापूजा

रांची में दुर्गापूजा के पंडाल केवल धार्मिक आयोजन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की स्थापत्य कला, पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को भी प्रदर्शित किया जा रहा है।

बृहदेश्वर मंदिर और द्वारकाधीश मंदिर से प्रेरित संरचनाओं से लेकर महाभारत की झांकियों और आधुनिक जीवन पर आधारित थीम तक, इस वर्ष के पंडालों में विविधता दिखाई दे रही है। मां दुर्गा के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं को इन कलात्मक प्रस्तुतियों को देखने का अवसर भी मिल रहा है।

Ranchi Durga Puja 2026 के दौरान शहर के विभिन्न पूजा पंडाल धार्मिक आस्था, रचनात्मकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।

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