JPSC-JSSC वार्ता कमेटी पर मंत्री राधाकृष्ण किशोर के बयान से बढ़ी सियासी हलचल, छात्र आंदोलन के बीच नई चर्चा

JPSC-JSSC छात्र आंदोलन: वार्ता कमेटी पर राधाकृष्ण किशोर के बयान से मचा राजनीतिक बवाल

JPSC-JSSC छात्र आंदोलन: वार्ता के लिए बनी उच्चस्तरीय कमेटी पर मंत्री राधाकृष्ण किशोर के बयान से सियासी चर्चा तेज

Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने समाधान की दिशा में पहल करते हुए एक उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का उद्देश्य आंदोलनरत छात्रों से संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर विचार करना और समाधान का रास्ता तलाशना बताया जा रहा है।

हालांकि, कमेटी के गठन के बाद राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

वार्ता कमेटी को लेकर मंत्री का बयान

मीडिया से बातचीत में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि गठित कमेटी का काम छात्रों के आंदोलन की स्थिति पर नजर रखना है। उनके इस बयान के बाद कमेटी की भूमिका को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

दूसरी ओर, सरकार के स्तर पर यह संकेत दिया गया है कि कमेटी का उद्देश्य छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझना और समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।

सरकार ने बनाई है बहुदलीय कमेटी

सरकार द्वारा गठित कमेटी में महागठबंधन के विभिन्न घटक दलों के मंत्री शामिल हैं। इसमें कांग्रेस की ओर से दीपिका पांडे सिंह, झामुमो की ओर से चमरा लिंडा और सुदिव्य कुमार सोनू तथा राजद की ओर से संजय प्रसाद यादव को शामिल किया गया है।

इससे पहले जिला प्रशासन की ओर से SDO और ADM ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचकर आंदोलनरत छात्रों से बातचीत की पहल की थी। छात्रों ने उस दौरान कहा था कि वे सभी वार्ताएं सार्वजनिक रूप से और पारदर्शी तरीके से करना चाहते हैं।

छात्र आंदोलन पर बनी हुई है नजर

JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर आंदोलन कई दिनों से जारी है। छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अपनी विभिन्न मांगों पर सरकार से स्पष्ट निर्णय चाहते हैं। सरकार की ओर से गठित कमेटी और शुरू हुई संवाद प्रक्रिया को गतिरोध समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब सभी की निगाहें सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली आगामी वार्ता पर टिकी हैं, जिससे आंदोलन के समाधान की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

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