मां रूपी सोरेन के श्राद्ध-कर्म के पांचवें दिन नेमरा में हेमंत सोरेन ने निभाईं पारंपरिक रस्में
Nemra, Ramgarh: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की स्मृति में पैतृक गांव नेमरा में पारंपरिक श्राद्ध-कर्म की रस्में निभा रहे हैं। सोमवार को श्राद्ध-कर्म के पांचवें दिन मुख्यमंत्री ने परिवार के सदस्यों के साथ स्थानीय मान्यताओं और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक रस्में पूरी कीं और अपनी मां को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
परिवार के साथ निभा रहे स्थानीय परंपराएं
नेमरा में सोरेन परिवार दिवंगत रूपी सोरेन के श्राद्ध-कर्म से जुड़े पारंपरिक संस्कारों का निर्वहन कर रहा है। मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री अपने पैतृक गांव में रहकर परिवार के साथ इन रस्मों में शामिल हो रहे हैं।
स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार निभाए जा रहे इन संस्कारों के जरिए दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जा रही है। परिवार के लिए यह समय शोक और पुरानी स्मृतियों से जुड़ा हुआ है।
शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी थीं रूपी सोरेन
रूपी सोरेन झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन की पत्नी थीं। सोरेन परिवार का झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
परिवार के संघर्षपूर्ण दौर में रूपी सोरेन ने पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाईं और बच्चों के पालन-पोषण में अहम भूमिका अदा की। उनके निधन से परिवार को निजी क्षति पहुंची है।
नेमरा में जारी है श्राद्ध-कर्म
नेमरा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पैतृक गांव है और सोरेन परिवार की जड़ों से जुड़ा हुआ है। यहां स्थानीय मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार श्राद्ध-कर्म की रस्में निभाई जा रही हैं।
श्राद्ध-कर्म के पांचवें दिन भी परिवार ने दिवंगत रूपी सोरेन को याद करते हुए पारंपरिक संस्कारों का पालन किया। गांव में निर्धारित रीति-रिवाजों के अनुसार श्राद्ध-कर्म की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
